सैटाइरिकल क्रिएशन है। कृपया फ़ेमिनाज़ी एवं भक्त वगेरा दूर रहें।

 

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आज मुझे भाव दो ज़रा।

आज मुझे भाव दो ज़रा,
वरना कल तुम्हे मोलेस्ट करूँगा।
इतने सालो का ज़ीरो-अटेंशन वाला फ्रसट्रेशन
मैं तुम पर ही निकालूंगा॥

मैं तुम्हारे इर्द-गिर्द हूँ
कभी चश्मे में, कभी ब्रेसेस में।
आई आई टी के प्रकोष्ठ में,
टि सि एस के क्यूबिकल में॥

सोशल नाईट में ऑकवर्ड खड़ा
मूवी हॉल में अकेला बैठा।
मजबूरी से मौनसागर में सन्निविष्ट
आज मुझे भाव दे दो ज़रा॥

आज मेरे ड्रेसिंग सेंस का मज़ाक मत उड़ाना,
मेरे बॉडी ऑडर को हेट मत करना।
मेरे अनप्रेसेंटेबिलिटी से दूर मत भागना
मेरे शाइनेस को जज मत करना॥

मैंने भी तोह तुमको चाहा है,
बॉडी शेमिंग से मुक्त किया है;
तुम्हारे ‘शॉपाहोलिक’नेस को स्वीकारा है।
तुम्हारे लिए डॉग पर्सन बना हूँ
‘typ lyk dis’ करना त्यागा हूँ॥

हाँ पता है तुम्हे फ़वाद चाहिए,
और हाँ सेंस ऑफ़ हीउमर भी चाहिए ।
स्पोंटेनियस ना सही ऑबसर्वेशनल ही मेरी
कॉमेडी पसंद करलो ज़रा ।
आज मुझे भाव दे दो ज़रा॥

नज़रअंदाज़ मत करो आज मुझे!

कल तुम्हारी ज़िन्दगी में वापस आऊंगा,
स्टार्ट अप का सीईओ बनके,
कभी पिएचडी गाइड बनके
कभी कास्टिंग डायरेक्टर बनके।

कभी रात को घर पे योगा के लिए बुलाऊंगा,
पीठ के टैटू को सेक्सी बोलके कमर पे हाथ रखूँगा,
कॉफी के बहाने वेस्टलाइन पे कमेंट करूँगा,
वर्कप्लेस में बॉस बनके सेक्सुअली हैरास करूँगा,
ओवर क्राउडेड बस में मुंह छिपाए ग्रोप करूँगा
इतने सालो का ज़ीरो-अटेंशन मैं पल पल में चुकवाऊंगा
ओवरनाइट पावर और सक्सेस का पूरा फ़ायदा उठाऊंगा।

ऐसे ही लेम तरीको से हिट करूँगा तुमपे,
ऐसे ही क्रीपी तरीको से एप्रोच करूँगा तुमको,
चाहे कितनी भी तरक्की क्यों न कर लू,
मैं तोह कल भी रहूँगा गीकपन से भरा।

आज मुझे भाव दो ज़रा।
आज मुझे भाव दे दो ज़रा॥

 

 

Disclaimer – जैसे अनुराग कश्यप को फ्रेम पर ‘नो स्मोकिंग’ टेक्स्ट डालना पसंद नहीं है, वैसे मुझे भी अपनी रचनाओं पर डिस्क्लेमर डालना पसंद नहीं है। फिर भी थोड़ा कुछ लिख ही देता हूँ। यह कविता एक पैरेलल यूनिवर्स के पैरेलल युवक की ज़ुबानी है। पर वह पूरे समुदाय को रप्रींट नहीं करता। कवी को नायक की ऐसी सोच और ऐसे लोगों पर धिक्कार है।

 

 

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